भाप इंजन से शुरू हुई भारतीय रेलवे ने पूरा किया 165 साल

ट्रेन अब बुलेट और इंजनलेस हो रही है। पिछले कुछ दिनों से भारतीय रेल को उच्च तकनीक से लैस किए जाने से लेकर दो और खबरों के लिए लगातार चर्चा में बनी हुई है। पहली कि रेलवे की सुविधाएं हवाई यातायात की तरह उच्च तकनीक से लैस होने के साथ-साथ रेल यात्रियों को उपलब्ध सीटों की जानकारी मुहैया कराई जाए। वहीं टूटती-फूटती और क्रैक होती पटरियों के बीच एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें कहा गया है कि भारतीय रेल जिन पुलों से होकर गुजरती हैं, उनमें से अधिकांश 100 वर्ष से भी पुराने हैं। भारतीय रेलवे, एशिया का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है और इसे दुनिया के दूसरे सबसे बड़े नेटवर्क की भी ख्याति मिली है जिसे एक ही मैनेजमेंट के अंतर्गत चलाया जा रहा है। हर दिन करीब 12,617 ट्रेनों पर 23 लाख यात्री सफर करते हैं। भारतीय रेल ट्रैक की कुल लंबाई 64 हजार किलोमीटर से अधिक है। वहीं अगर यार्ड, साइडिंग्स वगैरह सब जोड़ दिए जाएं तो यही लंबाई 1 लाख 10 हजार किलोमीटर से भी ज्यादा हो जाती है। इतने बड़े नेटवर्क को अब आधुनिकता की ओर ले जाना बहुत बड़ी कवायत के तौर पर देखा जा रहा है। इसके नेटवर्क को हाइटेक किया जा रहा है। रेल मंत्री पीयूष गोयल लगातार रेलवे को हाईटेक बनाने के लिए काम कर रहे हैं। रेलवे खान-पान से लेकर सुख सुविधाओं तक सबकुछ रेलमंत्री खुद ही देख रहे हैं। रेल यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा जरूरी जानकारी मुहैया कराई जाए। उन्होंने निर्देश दिया है कि किसी भी रेलगाड़ी में बुक हुई सीटों की जानकारी ऑनलाइन की जाए यही नहीं उन्होंने आदेश दिया कि रिजर्वेशन चार्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएं।

सरकार, रेलवे मंत्रालय अब देशवासियों को उच्च तकनीक से लैस रेलवे स्टेशन देने जा रहे हैं। यह स्टेशन हवाई अड्डो और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होंगे। पहले चरण में अत्याधुनिक सुविधाओं वाले ये स्टेशन दस होंगे आने वाले समय में सरकार की योजना 400 स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की है जिससे यात्री ट्रेन के इंतजार के समय परेशान न होकर अपना समय आराम से व्यतीत कर सकेंगे। अत्याधुनिक सुविधाओं वाले इस रेलवे स्टेशन की शुरुआत मध्यप्रदेश के और देश के पहले आईएसओ प्राप्त रेलवे स्टेशन हबीबगंज से शुरू कर दी है।

भारतीय रेल यात्रियों को सुविधाएं मुहैया कराने के अलावा कई नए बदलाव भी हो रहे हैं। इंडियन रेलवे की सभी ट्रेनें और देश के अधिकतर रेलवे स्टेशन जल्द ही नए लुक के साथ हाईटेक नजर आएंगे। देश में 1,14,000 किलोमीटर से ज्यादा लंबाई में फैला भारतीय रेल का जाल काफी तेजी से उच्चतकनीक से लैस किया जा रहा है।

यही नहीं स्टेशनों को उच्च तकनीक से लैस करने के लिए गूगल की मदद ली जा रही है। इसके लिए 400 भारतीय रेलवे स्टेशनों को वाई-फाई से जोड़ने का काम जारी है। यही नहीं रेलवे अपना मोबाइल एप लांच कर चुका है और कई सोशल साइट्स पर एक्टिव रहकर यात्रियों को सुविधा मुहैया करा रहा है।

16 अप्रैल 1853 को भारत की पहली रेल चली थी यह ट्रेन मुंबई से थाणे के बीच चलाई गई थी। भाप से चलती हुई रेलवे अब आधुनिकता के सर्वोच्च स्थान पर पहुंच चुकी है और अब यह कोयला, बिजली को बहुत पीछे छोड़ बिना ड्राइवर के सफर पर निकलने को तैयार है। ट्रेन ने इस बीच कई रूप बदले हैं। मेट्रो और टी 18 इसका आधुनिकतम रूप है। टी 18 ट्रेन लंबी दूरी की बिना इंजन की ट्रेन है जो पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड है। रेलवे की आधुनिकता के बाद अब रेलवे स्टेशन और स्टेशन परिसर के आधुनिक होने का समय आ चुका है।यह सूचना चौंकाएगी कि पहली ट्रेन 14 बोगी की थी, इस ट्रेन को 3 इंजनों की मदद से चलाया गया था। आज 165 वर्षों बाद देश में बुलेट ट्रेनों को चलाने की तैयारी जोर-शोर से जारी है। भारत एवं जापान के सहयोग से बनने वाली मुंबई – अहमदाबाद हाईस्पीड रेलवे लाइन का निर्माण वर्ष 2017 से ही शुरू हो चुका है। अनुमान है कि वर्ष 2023 के आरंभ में देश की पहली बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेंगी। गाड़ी की अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रतिघंटा और वास्तविक गति 320 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी।

कमीटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में रेल नेटवर्क 163 साल पुराना है। उसके बाद से नेटवर्क को जोड़ने के लिए रेल पुलों का निर्माण किया गया। इनमें से कुछ पर रेल परिचालन बंद कर दिया गया है, लेकिन अभी भी 37689 पुल ऐसे हैं, जो 100 साल से भी अधिक पुराने हैं।

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