मकर संक्रांति से जुड़ा है महाभारत का यह रहस्य

महाभारत की एक कथा के अनुसार महाभारत में युद्ध करते हुए पितामह भीष्म ने वचनबद्ध होने के कारण कौरव पक्ष की ओर से युद्ध किया था किंतु सत्य एवं न्याय की रक्षा हेतु उन्होंने स्वयं ही अपनी मृत्यु का रहस्य अर्जुन को बता दिया था। अर्जुन ने शिखंडी की आड़ में भीष्म पर इस कदर बाण वर्षा की कि उनका शरीर बाणों से बिंध गया तथा वह बाण शय्या पर लेट गए किंतु उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति तथा प्रभु कृपा के चलते मृत्यु का वरण नहीं किया क्योंकि उस समय सूर्य दक्षिणायन था। जैसे ही सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया और सूर्य उत्तरायण हो गया, भीष्म ने अर्जुन के बाण से निकली गंगा की धार का पान कर प्राण त्याग, मोक्ष प्राप्त किया। मकर संक्रांति पर विशेष रूप से उत्तरी भारत में गंगा स्नान करना विशेष पुण्य का निमित्त माना जाता है और इस दिन लाखों लोग गंगा स्नान करते हैं।

मकर संक्रांति को सूर्य एवं अग्रि की पूजा से भी जोड़ा जाता है। इस दिन तिल का दान करना विशेष महत्व रखता है। उत्तर-प्रदेश में तिल तथा तिलकुट का दान एवं खिचड़ी (दाल एवं चावल) तथा अनाज का दान करते हैं तो राजस्थान में पुए (पूड़े) तिल, तिलकुट, एवं बाजरा जैसे मोटे अनाज के दान के साथ-साथ पतंगबाजी का दृश्य देखते ही बनता है।
मकर संक्रांति को सूर्य एवं अग्नि की पूजा से भी जोड़ा जाता है। मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान के बाद नया जनेऊ धारण कर जरूरत मंद लोगों को भोजन अवश्य करना चाहिए और भोजन कराने के बाद कुछ चीज दान अवश्य करनी चाहिए। इससे आपके पूर्व जन्मों में किए गए पापों से मुक्ती मिल जाती है। कहा जाता है की इस दिन सूर्य का मकर में प्रवेश होने से ही सारे शुभ काम शुरु हो जाते हैं, क्योंकि खरमास समाप्त हो जाता है। जैसे बच्चों के मुंडन, छेदन संस्कार आदि।

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