सरदार पटेल ने क्यों तान दी जोधपुर नरेश पर पिस्टल?

यह बात सही है कि महापुरुष किसी एक पार्टी या राज्य के नहीं होते हैं। लेकिन उन्हें अपना बताने में उनके विचारों की हत्या करना और उनके व्यक्तित्व को अपने राजनीतिक लाभ के लिए तोड़ना-मरोड़ना इतिहास के साथ धोखा है। आश्चर्यजनक रूप से सरदार पटेल के साथ इस समय यही हो रहा है। सरदार पटेल पूरे देश को राजनीतिक और भौगोलिक रूप में एकता के सूत्र में जोड़ने के साथ-साथ देशवासियों को भावनात्मक रूप से भी एक करने के लिए जाने जाते हैं। आज जब उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को विखंडित करने की कोशिश की जा रही है, ऐसे में उनकी प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। आजादी के बाद विभिन्न रियासतों में बिखरे भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए पटेल को भारत का बिस्मार्क और लौह पुरुष भी कहा जाता है। राजे-रजवाड़ों को भारतीय संविधान मानने पर विवश करने के साथ ही उन्होंने सांप्रदायिक शक्तियों को भी कानून का पाठ पढ़ाया।

देश स्वतंत्र होने पर सरदार पटेल को उप प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री का कार्य सौंपा गया। गृह मंत्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता देशी रियासतों (राज्यों) को भारत में मिलाना था। 5 जुलाई 1947 को एक रियासत विभाग की स्थापना की गई थी। निःसंदेह सरदार पटेल द्वारा यह 562 रियासतों का एकीकरण विश्व इतिहास का एक आश्चर्य था। भारत की यह रक्तहीन क्रांति थी। महात्मा गांधी ने सरदार पटेल को इन रियासतों के बारे में लिखा था, ‘‘रियासतों की समस्या इतनी जटिल थी जिसे केवल तुम ही हल कर सकते थे।’ भारत के एकीकरण में उनके महान योगदान के लिये उन्हें भारत के लौह पुरूष के रूप में जाना जाता है। पटेल ने आजादी के पहले से ही वीपी मेनन के साथ मिलकर देशी रियासतों को भारत में मिलाने के लिये कार्य करना शुरू कर दिया था। पटेल ने राजाओं को बहुत समझाया कि उन्हें स्वायत्तता देना सम्भव नहीं होगा। इसके परिणामस्वरूप तीन को छोड़कर शेष सभी राजवाड़ों ने स्वेच्छा से भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। केवल जम्मू एवं कश्मीर, जूनागढ़ तथा हैदराबाद के राजाओं ने ऐसा करना नहीं स्वीकारा। जूनागढ़ के नवाब का जब बहुत विरोध हुआ तो वह भागकर पाकिस्तान चला गया और जूनागढ़ भी भारत में मिल गया। जब हैदराबाद के निजाम ने भारत में विलय का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया तो सरदार पटेल ने वहां सेना भेजकर निजाम का आत्मसमर्पण करा लिया।

एक बार उन्होंने सुना कि बस्तर की रियासत में कच्चे सोने का बड़ा भारी क्षेत्र है और इस भूमि को दीर्घकालिक पट्टे पर हैदराबाद की निजाम सरकार खरीदना चाहती है। उसी दिन वे परेशान हो उठे। उन्होंने अपना एक थैला उठाया, वी.पी. मेनन को साथ लिया और चल पड़े। वे उड़ीसा पहुंचे, वहां के 23 राजाओं से कहा, ‘‘कुएं के मेढक मत बनो, महासागर में आ जाओ।’’ उड़ीसा के लोगों की सदियों पुरानी इच्छा कुछ ही घंटों में पूरी हो गई। फिर नागपुर पहुंचे, यहां के 38 रिसायतों को ‘‘सैल्यूट स्टेट’’ कहा जाता था, यानी जब कोई इनसे मिलने जाता तो तोप छोड़कर सलामी दी जाती थी। पटेल ने इन राज्यों की बादशाहत को आखिरी सलामी दी। इसी तरह वे काठियावाड़ पहुंचे। वहां 250 रियासतें थी। कुछ तो केवल 20-20 गांव की रियासतें थीं। सबका एकीकरण किया। एक शाम मुम्बई पहुंचे। आस-पास के राजाओं से बातचीत की और उनकी राजसत्ता अपने थैले में डालकर चल दिए। पटेल पंजाब गये। पटियाला का खजाना देखा तो खाली था। फरीदकोट के राजा ने कुछ आनाकानी की। सरदार पटेल ने फरीदकोट के नक्शे पर अपनी लाल पेंसिल घुमाते हुए केवल इतना पूछा कि ‘‘क्या मर्जी है?’’

भारत की ओर से सरदार वल्लभ भाई पटेल और पाकिस्तान की ओर से मुहम्मद अली जिन्ना रियासतों को अपने पक्ष में मिलाने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे। इस दौरान कई मौके ऐसे आए जब रियासतों का रुझान कभी भारत, तो कभी पाकिस्तान की तरफ होता रहा। कुछ ऐसा ही राजस्थान की रियासतों के साथ भी था, लेकिन सरदार वल्लभ भाई पटेल अपने दृढ़ निश्चय से राजस्थान की ज्यादातर रियासतों का विलय भारत में कराने में सफल रहे। लेकिन जोधपुर नरेश हनुवंत सिंह आनाकानी कर रहे थे। वे जिन्ना के झांसे में आ गए थे। दूसरा पं. जवाहर लाल नेहरू से उनका मतभेद भी था। यह घटना 1949 की है जब जयपुर, जोधपुर को छोड़कर बाकी रियासतें राजस्थान में या तो शामिल हो चुकी थीं या शामिल होने पर सहमति दे चुकी थीं। जबकि बीकानेर और जैसलमेर रियासतें जोधपुर नरेश की हां पर टिकी हुई थी। जिन्ना ने हनुवंत सिंह को पाकिस्तान में शामिल होने पर पंजाब-मारवाड़ सूबे का प्रमुख बनाने का प्रलोभन दिया। तत्कालीन समय में जोधपुर से थार के रास्ते लाहौर तक एक रेल लाइन हुआ करती थी, जिससे सिंध और राजस्थान की रियासतों के बीच प्रमुख व्यापार हुआ करता था। जिन्ना ने आजीवन उस रेल लाइन पर जोधपुर के कब्जे का प्रलोभन भी दिया। जिसके चलते हनुवंत सिंह ने पाकिस्तान में शामिल होने की हां कर दी थी।

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