इस मुगल बादशाह की बेटी को हो गयी थी हिन्दू सम्राट से मोहब्बत, जीवन भर रही कुंवारी

मुगल शासकों और उनके उत्तराधिकारियों के बारे में आपने कई कहानियां सुनी होंगी। यहां तक की मुगल शासकों की पत्नियों की तमाम कहानियां भी आपने पढ़ी होंगी। लेकिन एक कहानी ऐसी है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ये कहानी मुगल शासक औरंगजेब की बेटी जेबुन्निसा की है। जेबुन्निसा को एक हिन्दू सम्राट से प्यार हो गया था, लेकिन जेबुन्निसा की शादी उससे नहीं हो पाई इसलिए वो जिंदगी भर कुंवारी रहीं।

ये कहानी है जेबुन्निसा और शिवाजी महाराज के बारे में। इस कहानी का जिक्र किताब शिवाजी द ग्रेट फ्राम आगरा नाम की किताब में किया गया है। आमतौर पर मुगल घरानों में एक प्रथा चली आ रही थी। मुगल राजा अपनी बेटियों की शादी अपने ही घरों में किया करते थे। रिश्ते के भाई-बहनों में शादी होना काफी आम बात हो गई थी।

उन दिनों दिल्ली में औरंगजेब का राज था। औरंगजेब के शासन में किसी भी दूसरे राजा का जिक्र करना मना था। लेकिन इसी बीच एक वीर योद्धा की कहानी दिल्ली में तेजी से फैल रही थी, ये योद्धा कोई और नहीं बल्कि शिवाजी महाराज थे। शिवाजी की कहानी न सिर्फ दिल्ली बल्कि देश के और भी कोनों में तेजी से फैल रही थी।

शिवाजी अपने पराक्रम से कई राजाओं को धूल चटा चुके थे। इन राजाओं में मुगल घराने का शायिस्ता खान भी शामिल था। शायिस्ता खान से हुई जंग में शिवाजी ने उसके महल में घुसकर उसके बेटे का सिर धड़ से अलग कर दिया था। बेटे की मौत से पागल हो चुका शायिस्ता खान दिल्ली की ओर रवाना हुआ। शायिस्ता खान ने मुगल दरबार में इस जंग के बारे में राजा को जानकारी दी। उसने राजा को बताया कि शिवाजी को रोकना बहुत मुश्किल हो गया है। शायिस्ता खान ने आगे कहा कि अगर शिवाजी को रोका नहीं गया तो वो दिल्ली को फतह करके दिल्ली का राजा बन जाएगा।मुगल दरबार में हो रही इस चर्चा को औरंगजेब की बेटी जेबुन्निसा एक कोने में खड़ी हो कर सुन रही थी। धीरे-धीरे दिन गुजरते गए और मुगल दरबार में शिवाजी के किस्से बढ़ते चले गए। जेबुन्निसा का लगाव शिवाजी के लिए बढ़ता ही जा रहा था। जेबुन्निसा को 27 साल की ही उम्र में ही मराठा योद्धा से प्यार हो गया था। उस वक्त शिवाजी की उम्र 39 साल थी और उनका आठ साल का एक बेटा भी था।साल 1666 में वो मौका भी ऐसा आया जब मुगल दरबार में खुद शिवाजी पहुंच गए। जेबुन्निसा को जैसे ही इस बात का पता चला वो नंगे पैर भागती हुई दरबार तक पहुंच गई। उस समय दरबार में राजकुमारी किसी के सामने नहीं जा सकती थी। जेबुन्निसा अपनी इस मजबूरी को जानती थी, लेकिन वो इस मौके को खोना नहीं चाहती थी। वो दरबार के कोने में पहुंच गई और एक पर्दे के पीछे खड़ी होकर सारी चीजें सुनने लगी। शिवाजी के चेहरे पर तेज और उनकी बुलंद आवाज को सुनकर सुल्तान की बेटी आपना दिल दे चुकी थी।

औरंगजेब शिवाजी की ताकत को जानता था। वो सोचने लगा कि अगर इस योद्धा की शादी अपनी बेटी से कर दे तो मुगलों को मराठाओं से फिर कोई भी चिंता नहीं होगी। औरंगजेब ने शिवाजी को रुकने के लिए कहा। इस दौरान शिवाजी को सुल्तान की बेटी और उनकी भावनाओं के बारे में भी पता चला। औरंगजेब ने शिवाजी को अपने बेटी से शादी करने का प्रस्ताव दिया लेकिन इसके लिए उसने एक शर्त रखी। औरंगजेब ने कहा कि वो छत्रपति महराज को अपनी बेटी और राजा का भी पद देगा लेकिन इसके लिए उन्हें इस्लाम कुबूल करना होगा। शिवाजी जेबुन्निसा की भावनाओं की बहुत कद्र करते थे लेकिन उन्हें धर्म बदलना स्वीकार नहीं था। छत्रपति जानते थे कि औरंगजेब का प्रस्ताव ठुकराना मतलब मुगलों से दुश्मनी है लेकिन उन्होने अपने उसूल से समझौता नहीं किया और शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया। वहीं सुल्तान की बेटी को जब इस बात का पता चला तो वो टूट गईं, लेकिन उनका प्यार खत्म नहीं हुआ। बल्कि उन्होंने पूरी जिंदगी शादी न करने का फैसला कर लिया।मराठी साहित्य के जानकारों का ये भी कहना है कि शिवाजी और जेबुन्निसा की शादी इसलिए नहीं हो पाई क्योंकि औरंगजेब की तरफ से ये शर्त रखी गई थी कि शिवाजी को मुस्लमान बनना पड़ेगा। साहित्यकारों के मुताबिक जब जेबुन्निसा को जब इस शर्त के बारे में पता चला तो उन्हें अपने पिता से नफरत हो गई। वो पूरी जिंदगी कुंवारी रहीं और अपने पिता से नफरत करती रहीं।कहते हैं कि जेबुन्निसा ने भले ही शिवाजी से शादी नहीं की। लेकिन उनका प्यार मराठा योद्धा के लिए हमेशा जवान रहा। जेबुन्निसा ने ‘मक्फी’ नाम की अपनी रचना में शिवाजी के लिए उनके प्रेम का जिक्र किया है। ये भारत के इतिहास की सबसे अलग और अमर प्रेम कहानियों में से एक है, जहां धर्म के बंधन को तोड़ कर सुल्तान की बेटी ने एक मराठा योद्धा से प्यार किया। आज भी ये कहानी लोगों को मिसाल के रूप में दी जाती है।

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