अशुभ माना जाता है होली के आठ दिन पहले का समय,क्या है इसके पीछे का कारण, जानिए यहां

होली का त्यौहार रंगो का त्यौहार माना जाता है, होली में आपसी मनमुटाव को दूर कर एक दूसरे से प्यार बढाने का दिन माना जाता है। इस बार होलाष्टक 13 मार्च यानी बुधवार से शुरु हो रहा है, जो 20 मार्च तक रहेगा। 20 मार्च के दिन होलिता दहन के साथ होली समाप्त हो जाएगा। होलाष्टक के दौरान सभी तरह के शुभ कार्य वर्जित माने जाते है। आज हम इस लेख में होली के दौरान शुभ कार्य क्यों वर्जित माने जाते हैं क्यों होलाष्टक को माना जाता है अशुभ इस के बारे में बता रहे हैं।

होली को लेकर मान्यता है कि भक्त प्रह्लाद की विष्णु भक्ति से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने होली से पहले प्रह्लाद को कई सारे कष्ट देने शुरु कर दिये, होली से पहले आठ दिनों में उन्हें कई तरह के कष्ट दिए थे जिस कारण से इन आठ दिनों को हिन्दू धर्म में अशुभ माना गया है। इसके साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि इन 8 दिनों में ग्रह अपना स्थान बदलते हैं ग्रहों के स्थान परिवर्तन के कारण भी होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।

शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के दिनों में व्रत करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और अगर किसी कारण से व्रत नहीं कर सकते तो इस दौरान दान करें, अपनी सामर्थ के अनुसार धन का दान करें वस्त्र या अनाज का दान कर सकते हैं।

होलाष्टक के दिनों में शुभ कार्य करने की मनाही होती है इस समय में विवाह, गृह प्रवेश, निर्माण, नामकरण आदि शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इन दिनों में नए काम भी शुरू नहीं किए जाते। ज्योतिषियों के अनुसार इन दिनों में जो कार्य किए जाते हैं उनसे कष्ट, पीड़ा आती है और विवाह आदि किए जाए तो भविष्‍य में इसके अशुभ परिणान देखने को मिलते हैं।

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