जानिये भारत के 5 जांबाज जासूसों के बारे में जिन्होंने पाकिस्तान की नाक में दम कर दिया था

आपने राजी फिल्म शायद देखी होगी। उस फिल्म को लोगों ने काफी पसंद भी किया था। फिल्म एक असली लड़की की जान पर खेल कर अपने देश के लिए जासूसी करने की कहानी थी। हालांकि थोड़ा-बहुत फेर-बदल फिल्म के हिसाब से किया गया था।

लेकिन कुल मिला कर लगभग पूरी ही फिल्म असली हिन्दुस्तानी जांबाज़ लड़की की ही कहानी थी। ऐसे और भी जासूस हैं जिन्होंने भारत के लिए जासूसी की है। पाकिस्तान में रह कर पाकिस्तानियों का जीना मुश्किल कर दिया था। आइये जानते है इन सर्वप्रसिद्ध 5 जासूसों के बारे में जिन्होंने भारत के लिए जासूसी करके जासूसी को बहुत ऊंचे शिखर पर पहुंचाया।

1.मोहनलाल भास्कर
बिना परिवार को भनक लगे मोहनलाल ने जासूसी की ट्रेनिंग लेनी प्रारम्भ कर दी थी। इस्लाम की पूरी तालीम दी गयी और नाम दिया गया मोहम्मद असलम। इसके बाद उन्हें पाकिस्तान रवाना कर दिया गया। इन्हे परमाणु बम के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने के लिए पाकिस्तान भेजा गया था। लेकिन एक ऐसा जासूस जो भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए जासूसी कर रहा था उसने मोहनलाल को धोखा दे दिया और मोहनलाल पकड़े गए। इसके लिए उन्हें 14 साल की सजा हुई। जेल से रिहा होकर भारत आने के बाद उन्होंने एक किताब लिखी एन इंडियन स्पाई इन पाकिस्तान।

2.रविंद्र कौशिक
यह एक थिएटर कलाकार थे। स्टेज पर काम करते देख कर ही RAW की नज़र उन पर पड़ी और उन्हें जासूसी के लिए तैयार किया गया। 2 साल की कठिन ट्रेनिंग के बाद 23 साल की उम्र में उन्हें पाकिस्तान भेजा गया। इन्हे नाम दिया गया नवी अहमद। वहां उन्होंने वकालत की पढ़ाई की। पढ़ाई करके वहां की आर्मी में ही नौकरी की। 1979-83 तक इन्होने बहुत सी जानकारियां भारत को भेजी। लेकिन RAW के ही एक दूसरे जासूस की एक छोटी सी गलती इनकी बर्बादी का कारण बन गयी। इन्हे ब्लैक-टाइगर के नाम से भी जाना जाता था। यह नाम इन्हे तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी ने दिया था।

3.कश्मीर सिंह
35 साल पाकिस्तान की जेल में रहने के बाद भारत वापस आये कश्मीर सिंह का काम था कि पाकिस्तानी सेना की गिनती करना और तस्वीरें लेकर भारत भेजना। बॉर्डर पर कितने सैनिक तैनात है इस सबकी जानकारी कश्मीर सिंह भारत को देते थे। मोहम्मद इब्राहिम नाम से उन्होंने पाकिस्तान में कई साल गुज़ारे और जासूसी करते रहे।

4.अजीत डोभाल
आज भी पाकिस्तानी सेना कि लिए अजीत डोभाल एक सरदर्द से कम नहीं हैं। 7 साल अजीत पाकिस्तान की जासूसी करते रहे थे। इस दौरान वह इस्लामाबाद में स्थित भारतीय उच्चायोग में नियुक्त रहे। डोभाल ने इस दौरान पाकिस्तान में रह कर परमाणु से सम्बंधित बहुत सी अहम् जानकारियां जुटायीं।

5.सरस्वती राजमणि
ऐसी ही एक जासूस यह रहीं। इन्होने 16 साल की उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था। राजमणि आज़ादी की लड़ाई में भारत की ओर से सम्मिलित हुई थीं। बोस की सेना में यह सबसे कम उम्र की सदस्य थीं। इन्हे आज़ादी की लड़ाई के दौरान जासूसी का काम सौंपा गया। यह अंग्रेजों के घरो में काम के बहाने से भेजी जाती थी ओर वहां से जानकारियां इकठ्ठा करके लाती थीं। एक दिन एक अंग्रेज अफसर ने यह काम करते हुए पकड़ लिया। राजमणि उनके हाथ न आके भाग गयी। भागते हुए उसके पैर में गोली लगी पर उसके हौसले पस्त नहीं हुए। अंग्रेजों के हाथ नहीं आयी। लेकिन धीरे-धीरे राजमणि का नाम इतिहास के पन्नो से गायब कर दिया गया।

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