आश्रम बनाने के नाम पर गांजा उगा रहा था मुंबई का एक बाबा

गांजा (Cannabis या marijuana), एक मादक पदार्थ (ड्रग) है जो गांजे के पौधे से भिन्न-भिन्न विधियों से बनाया जाता है। इसका उपयोग मनोसक्रिय मादक (psychoactive drug) के रूप में किया जाता है। मादा भांग के पौधे के फूल, आसपास की पत्तियों एवं तनों को सुखाकर बनने वाला गांजा सबसे सामान्य (कॉमन) है। गाँजा एक मादक द्रव्य है जो कैनाबिस सैटाइवा (Cannabis sativa Linn) नामक वनस्पति से प्राप्त होता है। यह मोरेसिई (Moreaceae) कुल के कनाब्वायडी समुदाय का पौधा है। यह मध्य एशिया का आदिनिवासी है, परंतु समशीतोष्ण एवं उष्ण कटिबंध के अनेक प्रदेशों में स्वयंजात अथवा कृषिजन्य रूपों में पाया जाता है। भारत में बीज की बोआई वर्षा ऋतु में की जाती है। गाँजे का क्षुप प्राय: एकलिंग, एकवर्षायु और अधिकतर चार से आठ फुट तक ऊँचा होता है। इसके कांड सीधे और कोणयुक्त, पत्तियाँ करतलाकार, तीन से आठ पत्रकों तक में विभक्त, पुष्प हरिताभ, नर पुष्पमंजरियाँ लंबी, नीचे लटकी हुई और रानी मंजरियाँ छोटी, पत्रकोणीय शुकिओं (Spikes) की होती हैं। फल गोलाई लिए लट्टु के आकार का और बीज जैसा होता है। पौधे गंधयुक्त, मृदुरोमावरण से ढके हुए और रेज़िन स्राव के कारण किंचित्‌ लसदार होते हैं।

वैसे तो भारत में गांजे की खेती, आम लोगों के सेवन के लिए ग़ैरक़ानूनी है और इसकी खेती सिर्फ़ दवाई बनाने के लिए हो सकती है पर ये उतना ही क़ानूनी है, जितना लाल बत्ती देखकर ठहरना.

अब हुआ कुछ ऐसा ही कि मुंबई में एक बाबाजी आश्रम बनाने के नाम पर गांजे के पौधे उगा रहे थे.

Times Now की रिपोर्ट के अनुसार, बोईसर में एक 81 साल के ‘साधू’ गांजा उगा रहे थे. बोईसर के एक गांव में बिहार के साधू इंद्रदेव रामकिशोरदास भजगोविंद ग़ैरक़ानूनी ढंग से गांजे की खेती कर रहे थे.

आरोपी साधू का कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि गांजे की खेती ग़ैरक़ानूनी है और ये उन्हें साधना और काम-तृष्णा को दूर रखने में सहायता करता है. HT की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने साधू से 905 ग्राम गांजा बरामद किया है, जिसकी क़ीमत 1.42 लाख बताई जा रही है. साधू रामकिशोरदास अपने एक Under Construction आश्रम में रहते थे.

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